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ramayan 6.27.45-46h: बलवान, वीर और पराक्रमी शतबली अपने बल पर ही युद्ध के लिए खड़ा है और अपनी सेना के साथ लंकापुरी को कुचल देना चाहता है। यह वीर वानर भगवान राम को प्रसन्न करने के लिए अपने प्राणों की भी परवाह नहीं करता।   |   ramayan सर्ग 6.27: वानरसेना के प्रधान यूथपतियों का परिचय   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 27: वानरसेना के प्रधान यूथपतियों का परिचय  »  श्लोक 45-46h
 
 
श्लोक  6.27.45-46h 
एषैवाशंसते लङ्कां स्वेनानीकेन मर्दितुम्।
विक्रान्तो बलवान् शूर: पौरुषे स्वे व्यवस्थित:॥ ४५॥
रामप्रियार्थं प्राणानां दयां न कुरुते हरि:।
 
 
अनुवाद
बलवान, वीर और पराक्रमी शतबली अपने बल पर ही युद्ध के लिए खड़ा है और अपनी सेना के साथ लंकापुरी को कुचल देना चाहता है। यह वीर वानर भगवान राम को प्रसन्न करने के लिए अपने प्राणों की भी परवाह नहीं करता।
 
Strong, valiant and valiant Shatabali is standing for the battle relying on his own efforts and wants to crush Lankapuri with his army. This brave monkey does not even spare his own life for the sake of pleasing Lord Rama. 45 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)