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ramayan 6.27.38-39h: साठ हज़ार सुन्दर स्वर्णमय पर्वतों में एक महान पर्वत है, जिसका नाम सावर्णिमेरु है। हे पापरहित रात्रिचर! जैसे तुम दैत्यों में श्रेष्ठ हो, वैसे ही वह सावर्णिमेरु पर्वतों में श्रेष्ठ है। 38 1/2॥   |   ramayan सर्ग 6.27: वानरसेना के प्रधान यूथपतियों का परिचय   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 27: वानरसेना के प्रधान यूथपतियों का परिचय  »  श्लोक 38-39h
 
 
श्लोक  6.27.38-39h 
षष्टिर्गिरिसहस्राणि रम्या: काञ्चनपर्वता:॥ ३८॥
तेषां मध्ये गिरिवरस्त्वमिवानघ रक्षसाम्।
 
 
अनुवाद
साठ हज़ार सुन्दर स्वर्णमय पर्वतों में एक महान पर्वत है, जिसका नाम सावर्णिमेरु है। हे पापरहित रात्रिचर! जैसे तुम दैत्यों में श्रेष्ठ हो, वैसे ही वह सावर्णिमेरु पर्वतों में श्रेष्ठ है। 38 1/2॥
 
Among the sixty thousand beautiful golden mountains, there is a great mountain, whose name is Savarnimeru. Sinless night wanderer! Just as you are the best among the demons, similarly that Savarnimeru is the best among the mountains. 38 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)