Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.27.13-14: उनके बहुत से सैनिक विचरण करते हैं, जिनके बल और पराक्रम की कोई सीमा नहीं है। उनके शरीर विशाल रोमों से आच्छादित हैं। वे राक्षसों और पिशाचों के समान क्रूर हैं और वहाँ से वे बड़े-बड़े पर्वत शिखरों पर चढ़कर शत्रुओं पर मेघों के समान विशाल और चौड़े शिलाखंड फेंकते हैं। वे मृत्यु से कभी नहीं डरते।॥13-14॥ | ramayan सर्ग 6.27: वानरसेना के प्रधान यूथपतियों का परिचय । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आरुह्य पर्वताग्रेभ्यो महाभ्रविपुला: शिला:।
मुञ्चन्ति विपुलाकारा न मृत्योरुद्विजन्ति च॥ १३॥
राक्षसानां च सदृशा: पिशाचानां च रोमशा:।
एतस्य सैन्या बहवो विचरन्त्यमितौजस:॥ १४॥
अनुवाद
उनके बहुत से सैनिक विचरण करते हैं, जिनके बल और पराक्रम की कोई सीमा नहीं है। उनके शरीर विशाल रोमों से आच्छादित हैं। वे राक्षसों और पिशाचों के समान क्रूर हैं और वहाँ से वे बड़े-बड़े पर्वत शिखरों पर चढ़कर शत्रुओं पर मेघों के समान विशाल और चौड़े शिलाखंड फेंकते हैं। वे मृत्यु से कभी नहीं डरते।॥13-14॥
‘Many of their soldiers roam around, whose strength and valour has no limits. All of their bodies are covered with huge hair. They are as cruel as demons and vampires and from there they climb the big mountain peaks and throw huge and wide boulders like great clouds on the enemies. They are never afraid of death.॥ 13-14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥