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ramayan 6.25.31-32h: श्री रामचन्द्रजी का रूप और उनके अस्त्र-शस्त्र यह संकेत देते हैं कि यदि अन्य तीन योद्धा बैठे भी रहें, तो भी वे अकेले ही सम्पूर्ण लंकापुरी का विनाश कर देंगे॥31 1/2॥   |   ramayan सर्ग 6.25: रावण का शुक और सारण को गुप्त रूप से वानरसेना में भेजना, श्रीराम का संदेश लेकर लङ्का में लौट रावण को समझाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 25: रावण का शुक और सारण को गुप्त रूप से वानरसेना में भेजना, श्रीराम का संदेश लेकर लङ्का में लौट रावण को समझाना  »  श्लोक 31-32h
 
 
श्लोक  6.25.31-32h 
यादृशं तद्धि रामस्य रूपं प्रहरणानि च॥ ३१॥
वधिष्यति पुरीं लङ्कामेकस्तिष्ठन्तु ते त्रय:।
 
 
अनुवाद
श्री रामचन्द्रजी का रूप और उनके अस्त्र-शस्त्र यह संकेत देते हैं कि यदि अन्य तीन योद्धा बैठे भी रहें, तो भी वे अकेले ही सम्पूर्ण लंकापुरी का विनाश कर देंगे॥31 1/2॥
 
‘The appearance of Shri Ramchandra and the weapons he has, indicate that he alone will destroy the entire Lankapuri, even if the other three warriors remain seated.॥ 31 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)