श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 25: रावण का शुक और सारण को गुप्त रूप से वानरसेना में भेजना, श्रीराम का संदेश लेकर लङ्का में लौट रावण को समझाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  6.25.3 
सागरे सेतुबन्धं तं न श्रद्दध्यां कथंचन।
अवश्यं चापि संख्येयं तन्मया वानरं बलम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
लोगों से सुनकर भी मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि समुद्र पर पुल बन गया है। वानर सेना कितनी बड़ी है? मुझे इसका पता लगाना चाहिए॥3॥
 
Even after hearing from people I do not believe that a bridge has been built over the sea. How big is the monkey army? I must find out about it.॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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