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ramayan 6.25.27-28h: दैत्यों के स्वामी! विभीषण ने मुझे मारने के लिए पकड़ लिया था, परंतु जब धर्मात्मा और सदाचारी भगवान राम ने मुझे देखा, तो उन्होंने मुझे मुक्त कर दिया॥27 1/2॥   |   ramayan सर्ग 6.25: रावण का शुक और सारण को गुप्त रूप से वानरसेना में भेजना, श्रीराम का संदेश लेकर लङ्का में लौट रावण को समझाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 25: रावण का शुक और सारण को गुप्त रूप से वानरसेना में भेजना, श्रीराम का संदेश लेकर लङ्का में लौट रावण को समझाना  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  6.25.27-28h 
विभीषणगृहीतौ तु वधार्थं राक्षसेश्वर॥ २७॥
दृष्ट्वा धर्मात्मना मुक्तौ रामेणामिततेजसा।
 
 
अनुवाद
दैत्यों के स्वामी! विभीषण ने मुझे मारने के लिए पकड़ लिया था, परंतु जब धर्मात्मा और सदाचारी भगवान राम ने मुझे देखा, तो उन्होंने मुझे मुक्त कर दिया॥27 1/2॥
 
Lord of demons! Vibhishan had captured me to kill me, but when the virtuous and virtuous Lord Rama saw me, he freed me.॥ 27 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)