श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 25: रावण का शुक और सारण को गुप्त रूप से वानरसेना में भेजना, श्रीराम का संदेश लेकर लङ्का में लौट रावण को समझाना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  6.25.22 
प्रविश्य महतीं लङ्कां भवद्‍भ्यां धनदानुज:।
वक्तव्यो रक्षसां राजा यथोक्तं वचनं मम॥ २२॥
 
 
अनुवाद
शुक और सारण! जब तुम दोनों लंका पहुँचो, तब कुबेर के छोटे भाई राक्षसराज रावण को मेरा यह संदेश देना -॥ 22॥
 
Shuka and Saran! When you both reach Lanka, then convey this message from me to the demon king Ravana, younger brother of Kubera -॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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