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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 25: रावण का शुक और सारण को गुप्त रूप से वानरसेना में भेजना, श्रीराम का संदेश लेकर लङ्का में लौट रावण को समझाना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  6.25.20 
न चेदं ग्रहणं प्राप्य भेतव्यं जीवितं प्रति।
न्यस्तशस्त्रौ गृहीतौ च न दूतौ वधमर्हथ:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
अब जब तुम पकड़े गए हो तो तुम्हें अपने प्राणों की चिंता नहीं करनी चाहिए; क्योंकि तुम दोनों दूत बिना हथियार के पकड़े गए हो और मारे जाने के योग्य नहीं हो।
 
Now that you have been captured, you should not fear for your lives; because you two messengers, caught without weapons, are not worthy of being killed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)