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ramayan 6.25.14: हे शत्रु नगर को जीतने वाले नरेश्वर! ये दोनों लंका से आये हुए गुप्तचर और राक्षसराज रावण के मंत्री शुक और सारण हैं॥14॥   |   ramayan सर्ग 6.25: रावण का शुक और सारण को गुप्त रूप से वानरसेना में भेजना, श्रीराम का संदेश लेकर लङ्का में लौट रावण को समझाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 25: रावण का शुक और सारण को गुप्त रूप से वानरसेना में भेजना, श्रीराम का संदेश लेकर लङ्का में लौट रावण को समझाना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  6.25.14 
तस्यैतौ राक्षसेन्द्रस्य मन्त्रिणौ शुकसारणौ।
लङ्काया: समनुप्राप्तौ चारौ परपुरंजय॥ १४॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रु नगर को जीतने वाले नरेश्वर! ये दोनों लंका से आये हुए गुप्तचर और राक्षसराज रावण के मंत्री शुक और सारण हैं॥14॥
 
O Nareshwar who conquered the enemy city! These two are Shuka and Saran, spies who have come from Lanka and ministers of the demon king Ravana. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)