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ramayan 6.25.11: वह सेना पर्वत शिखरों पर, झरनों के आसपास, गुफाओं में, समुद्र के किनारे तथा जंगलों और उद्यानों में फैली हुई थी। उसका कुछ भाग समुद्र पार कर रहा था, कुछ पार कर चुका था और कुछ हर तरह से समुद्र पार करने की तैयारी में लगा हुआ था।   |   ramayan सर्ग 6.25: रावण का शुक और सारण को गुप्त रूप से वानरसेना में भेजना, श्रीराम का संदेश लेकर लङ्का में लौट रावण को समझाना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 25: रावण का शुक और सारण को गुप्त रूप से वानरसेना में भेजना, श्रीराम का संदेश लेकर लङ्का में लौट रावण को समझाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  6.25.11 
तत् स्थितं पर्वताग्रेषु निर्झरेषु गुहासु च।
समुद्रस्य च तीरेषु वनेषूपवनेषु च।
तरमाणं च तीर्णं च तर्तुकामं च सर्वश:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
वह सेना पर्वत शिखरों पर, झरनों के आसपास, गुफाओं में, समुद्र के किनारे तथा जंगलों और उद्यानों में फैली हुई थी। उसका कुछ भाग समुद्र पार कर रहा था, कुछ पार कर चुका था और कुछ हर तरह से समुद्र पार करने की तैयारी में लगा हुआ था।
 
That army was spread on the mountain peaks, around the waterfalls, in caves, on the seashore and also in forests and gardens. Some of its part was crossing the sea, some had already crossed it and some were busy in preparing to cross the sea in every way.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)