श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 24: श्रीराम का लक्ष्मण से लङ्का की शोभा का वर्णन कर सेना को व्यूहबद्ध करना, रावण का अपने बल की डींग हाँकना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  6.24.41 
न मे तूणीशयान् बाणान् सविषानिव पन्नगान्।
राम: पश्यति संग्रामे तेन मां योद्धुमिच्छति॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
मेरे तरकश में सोये हुए बाण विषैले सर्पों के समान भयंकर हैं। राम ने युद्ध में उन बाणों को नहीं देखा है; इसीलिए वे मुझसे युद्ध करना चाहते हैं॥ 41॥
 
‘The arrows lying asleep in my quiver are as dangerous as poisonous serpents. Rama has not seen those arrows in the battle; that is why he wants to fight with me.॥ 41॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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