श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 24: श्रीराम का लक्ष्मण से लङ्का की शोभा का वर्णन कर सेना को व्यूहबद्ध करना, रावण का अपने बल की डींग हाँकना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  6.24.33 
राक्षसानां बलौघस्य वानरेन्द्रबलस्य च।
नैतयोर्विद्यते संधिर्देवदानवयोरिव॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार देवताओं और दानवों का आपस में संधि करना असम्भव है, उसी प्रकार दानवों और वानरराज सुग्रीव के सैनिकों में भी संधि नहीं हो सकती॥ 33॥
 
‘Just as it is impossible for gods and demons to come to terms with each other, similarly there can be no treaty between demons and the soldiers of the monkey king Sugreeva.॥ 33॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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