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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 24: श्रीराम का लक्ष्मण से लङ्का की शोभा का वर्णन कर सेना को व्यूहबद्ध करना, रावण का अपने बल की डींग हाँकना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  6.24.29 
न ते संभाषितुं शक्या: सम्प्रश्नोऽत्र न विद्यते।
प्रकृत्या कोपनास्तीक्ष्णा वानरा राक्षसाधिप॥ २९॥
 
 
अनुवाद
हे दैत्यराज! वे वानर स्वभाव से ही क्रोधी और तीखे हैं। उनसे बात भी नहीं की जा सकती थी। फिर यह पूछने का अवसर ही कहाँ था कि आप मुझे क्यों मार रहे हैं?
 
‘O King of Demons! Those monkeys are by nature short-tempered and sharp. They could not even be talked to. Then where was the opportunity to ask why are you killing me?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)