श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 24: श्रीराम का लक्ष्मण से लङ्का की शोभा का वर्णन कर सेना को व्यूहबद्ध करना, रावण का अपने बल की डींग हाँकना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  6.24.28 
क्रुद्धैस्तैरहमुत्प्लुत्य दृष्टमात्र: प्लवंगमै:।
गृहीतोऽस्म्यपि चारब्धो हन्तुं लोप्तुं च मुष्टिभि:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
परन्तु जैसे ही क्रोधित वानरों ने मुझे देखा, वे उछलकर मुझे पकड़ लिए और मुझे लात मारने लगे तथा मेरे पंख नोचने लगे॥28॥
 
‘But the moment the enraged monkeys saw me, they jumped up and caught hold of me and began kicking me and plucking my wings.॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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