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श्लोक 6.24.2  |
प्रचचाल च वेगेन त्रस्ता चैव वसुंधरा।
पीडॺमाना बलौघेन तेन सागरवर्चसा॥ २॥ |
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| अनुवाद |
| वह विशाल सेना समुद्र के समान दिखाई देती थी। उसके भार से दबी हुई पृथ्वी भयभीत हो गई और उसके वेग से डोलने लगी॥2॥ |
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| That huge army looked like the ocean. The earth, weighed down by its weight, became afraid and began to sway with its force.॥2॥ |
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