श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 23: श्रीराम का लक्ष्मण से उत्पातसूचक लक्षणों का वर्णन और लङ्का पर आक्रमण  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  6.23.5 
मेघा: क्रव्यादसंकाशा: परुषा: परुषस्वना:।
क्रूरा: क्रूरं प्रवर्षन्ति मिश्रं शोणितबिन्दुभि:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
'मांसभक्षी राक्षसों के समान मेघों के बादल उमड़ आए हैं। वे मेघ न केवल देखने में क्रूर हैं, बल्कि उनकी गर्जना भी अत्यंत कठोर है। वे क्रूरतापूर्वक रक्त की बूँदों से मिश्रित जल की वर्षा कर रहे हैं॥5॥
 
‘Clouds of clouds have gathered, which look like flesh-eating demons. Those clouds are not only cruel in appearance, their roar is also very harsh. They cruelly rain water mixed with drops of blood.॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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