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श्लोक 6.23.11  |
काका: श्येनास्तथा नीचा गृध्रा: परिपतन्ति च।
शिवाश्चाप्यशुभान् नादान् नदन्ति सुमहाभयान्॥ ११॥ |
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| अनुवाद |
| ‘कौवे, बाज और नीच गिद्ध सब ओर उड़ रहे हैं और सियारियाँ अशुभ और भयानक शब्द बोल रही हैं ॥ 11॥ |
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| ‘Crows, hawks and lowly vultures are flying all around and the female jackals are uttering ominous and terrifying words.॥ 11॥ |
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