श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 22: नल के द्वारा सागर पर सौ योजन लंबे पुल का निर्माण तथा उसके द्वारा श्रीराम सहित वानरसेना का उस पार पड़ाव डालना  »  श्लोक 81-83h
 
 
श्लोक  6.22.81-83h 
सुग्रीवस्तु तत: प्राह रामं सत्यपराक्रमम्॥ ८१॥
हनूमन्तं त्वमारोह अङ्गदं त्वथ लक्ष्मण:।
अयं हि विपुलो वीर सागरो मकरालय:॥ ८२॥
वैहायसौ युवामेतौ वानरौ धारयिष्यत:।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् सुग्रीव ने वीर श्रीराम से कहा, "हे वीर! आप हनुमान के कंधों पर चढ़िए और लक्ष्मण अंगद की पीठ पर सवार हो जाइए; क्योंकि यह मकरलय समुद्र अत्यंत विशाल है। ये दोनों वानर आकाश में विचरण करते हैं। अतः केवल ये ही आप दोनों भाइयों को धारण कर सकेंगे।"
 
Thereafter Sugreeva said to the valiant Sri Rama, 'O brave one! You climb on Hanuman's shoulders and Lakshmana rides on Angada's back; because this Makaralay sea is very vast. These two monkeys travel through the sky. Hence only these two will be able to hold you two brothers.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)