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श्लोक 6.22.74  |
स नलेन कृत: सेतु: सागरे मकरालये।
शुशुभे सुभग: श्रीमान् स्वातीपथ इवाम्बरे॥ ७४॥ |
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| अनुवाद |
| मैकालय समुद्र में नल द्वारा बनाया गया वह सुन्दर एवं मनोहर सेतु आकाश में स्वातिपथ (छाया पथ) के समान शोभायमान हो रहा था। ॥7 4॥ |
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| That beautiful and graceful bridge built by Nal in the Makalaya sea looked as beautiful as the Swatipath (shadow path) in the sky. ॥ 7 4॥ |
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