श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 22: नल के द्वारा सागर पर सौ योजन लंबे पुल का निर्माण तथा उसके द्वारा श्रीराम सहित वानरसेना का उस पार पड़ाव डालना  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  6.22.73 
स वानरवर: श्रीमान् विश्वकर्मात्मजो बली।
बबन्ध सागरे सेतुं यथा चास्य पिता तथा॥ ७३॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार विश्वकर्मा के पराक्रमी पुत्र कांतिमान कपिश्रेष्ठ नल ने समुद्र पर सौ योजन लम्बा सेतु तैयार किया। इस कार्य में वे अपने पिता के समान ही प्रतिभाशाली थे ॥73॥
 
In this way Vishwakarma's powerful son Kantiman Kapishreshtha Nala prepared a hundred yojana long bridge across the ocean. In this work he was as talented as his father. 73॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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