श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 22: नल के द्वारा सागर पर सौ योजन लंबे पुल का निर्माण तथा उसके द्वारा श्रीराम सहित वानरसेना का उस पार पड़ाव डालना  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  6.22.48 
अहं सेतुं करिष्यामि विस्तीर्णे मकरालये।
पितु: सामर्थ्यमासाद्य तत्त्वमाह महोदधि:॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
'प्रभु! मैं अपने पिता की दी हुई शक्ति से इस विशाल सागर पर पुल बनाऊँगा। सागर ने सत्य कहा है।' 48.
 
‘Lord! With the power given by my father, I will build a bridge over this vast ocean. The ocean has spoken the truth. 48.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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