श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 22: नल के द्वारा सागर पर सौ योजन लंबे पुल का निर्माण तथा उसके द्वारा श्रीराम सहित वानरसेना का उस पार पड़ाव डालना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  6.22.42 
पशव्यश्चाल्परोगश्च फलमूलरसायुत:।
बहुस्नेहो बहुक्षीर: सुगन्धिर्विविधौषधि:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
यह मरुस्थल प्राणियों के लिए लाभदायक होगा। यहाँ रोग कम होंगे। यह भूमि फलों, मूलों और रसों से भरपूर होगी। यहाँ मक्खन और अन्य तैलीय पदार्थ अधिक सुगमता से उपलब्ध होंगे, दूध भी प्रचुर मात्रा में होगा। यहाँ सुगंध होगी और अनेक प्रकार की औषधियाँ उत्पन्न होंगी।॥42॥
 
‘This desert will be beneficial for animals. There will be fewer diseases here. This land will be rich in fruits, roots and juices. Butter and other oily substances will be more easily available here, there will also be abundance of milk. There will be fragrance here and many types of medicines will be produced.’॥ 42॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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