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श्लोक 6.22.35  |
तस्य तद् वचनं श्रुत्वा सागरस्य महात्मन:।
मुमोच तं शरं दीप्तं परं सागरदर्शनात्॥ ३५॥ |
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| अनुवाद |
| महाप्रतापी समुद्र के ये वचन सुनकर भगवान राम ने समुद्र द्वारा बताये गये स्थान पर ही प्रज्वलित बाण चलाया। |
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| Having heard these words of the great Samudra, Lord Rama shot the blazing arrow in the same place as shown by the Samudra. 35. |
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