श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 22: नल के द्वारा सागर पर सौ योजन लंबे पुल का निर्माण तथा उसके द्वारा श्रीराम सहित वानरसेना का उस पार पड़ाव डालना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  6.22.3 
मत्कार्मुकविसृष्टेन शरवर्षेण सागर।
परं तीरं गमिष्यन्ति पद्भिरेव प्लवंगमा:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हे समुद्र! जब मेरे धनुष से निकले बाणों की वर्षा से तुम्हारी ऐसी दशा होगी, तब वानर पैदल ही तुम्हारे उस पार पहुँच जायेंगे।
 
O Ocean! When you will be in such a state due to the shower of arrows from my bow, then the monkeys will reach the other side of you on foot.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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