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श्लोक 6.22.29  |
विधास्ये येन गन्तासि विषहिष्येऽप्यहं तथा।
न ग्राहा विधमिष्यन्ति यावत्सेना तरिष्यति।
हरीणां तरणे राम करिष्यामि यथा स्थलम्॥ २९॥ |
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| अनुवाद |
| ‘श्रीराम! मैं तुम्हें ऐसा उपाय बताता हूँ जिससे तुम पार हो जाओगे, मगरमच्छ वानरों को कष्ट नहीं देंगे, सारी सेना पार हो जाएगी और मुझे भी दुःख नहीं होगा। मैं सब कुछ सहज ही सहन कर लूँगा। मैं वानरों के पार जाने के लिए एक पुल बनाने का प्रयत्न करूँगा।’॥29॥ |
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| ‘Shri Ram! I will tell you such a way by which you will cross over, the crocodiles will not trouble the monkeys, the whole army will cross over and I will not feel sorry either. I will easily bear everything. I will try to make a bridge for the monkeys to cross over.’॥ 29॥ |
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