श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 22: नल के द्वारा सागर पर सौ योजन लंबे पुल का निर्माण तथा उसके द्वारा श्रीराम सहित वानरसेना का उस पार पड़ाव डालना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  6.22.28 
न कामान्न च लोभाद् वा न भयात् पार्थिवात्मज।
ग्राहनक्राकुलजलं स्तम्भयेयं कथंचन॥ २८॥
 
 
अनुवाद
राजकुमार! मैं मगरमच्छ और नासिका आदि से भरे हुए अपने जल को किसी कामना, लोभ या भय से नहीं रुकने दूँगा॥ 28॥
 
Prince! I will not allow my water, which is filled with crocodiles and nose etc., to be stopped by any desire, greed or fear.॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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