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श्लोक 6.22.28  |
न कामान्न च लोभाद् वा न भयात् पार्थिवात्मज।
ग्राहनक्राकुलजलं स्तम्भयेयं कथंचन॥ २८॥ |
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| अनुवाद |
| राजकुमार! मैं मगरमच्छ और नासिका आदि से भरे हुए अपने जल को किसी कामना, लोभ या भय से नहीं रुकने दूँगा॥ 28॥ |
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| Prince! I will not allow my water, which is filled with crocodiles and nose etc., to be stopped by any desire, greed or fear.॥ 28॥ |
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