श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 22: नल के द्वारा सागर पर सौ योजन लंबे पुल का निर्माण तथा उसके द्वारा श्रीराम सहित वानरसेना का उस पार पड़ाव डालना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.22.18 
पन्नगै: सह दीप्तास्यै: समुद्र: प्रत्यदृश्यत।
स्निग्धवैदूर्यसंकाशो जाम्बूनदविभूषण:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
समुद्र में चमकीले मुख वाले सर्प दिखाई दे रहे थे। उसका रंग कोमल वैदूर्य मणि के समान श्याम था। वह जम्बूण्ड नामक स्वर्ण के आभूषण पहने हुए था।
 
The ocean was seen with serpents having bright faces. Its colour was dark like a soft vaidurya gem. It was wearing ornaments made of gold called Jambuṇḍa.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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