श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 22: नल के द्वारा सागर पर सौ योजन लंबे पुल का निर्माण तथा उसके द्वारा श्रीराम सहित वानरसेना का उस पार पड़ाव डालना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  6.22.16 
तं तथा समतिक्रान्तं नातिचक्राम राघव:।
समुद्धतममित्रघ्नो रामो नदनदीपतिम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
जब समस्त नदियों और जलधाराओं के स्वामी अभिमानी समुद्र ने अपनी सीमा लाँघ दी, तब भी शत्रुओं का संहार करने वाले भगवान् राम अपने स्थान से पीछे नहीं हटे॥16॥
 
Even when the arrogant ocean, the lord of all rivers and streams, crossed its limits, Lord Rama, the slayer of enemies, did not move back from His place. ॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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