श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 22: नल के द्वारा सागर पर सौ योजन लंबे पुल का निर्माण तथा उसके द्वारा श्रीराम सहित वानरसेना का उस पार पड़ाव डालना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  6.22.1 
अथोवाच रघुश्रेष्ठ: सागरं दारुणं वच:।
अद्य त्वां शोषयिष्यामि सपातालं महार्णव॥ १॥
 
 
अनुवाद
तब रघुकुल के पुत्र श्री राम ने कठोर शब्दों में समुद्र से कहा - 'सागर! आज मैं तुम्हें पाताल सहित सुखा दूँगा।'॥1॥
 
Then Shri Ram, the son of the Raghukul, said to the ocean in harsh words - 'Ocean! Today I will dry you up along with the underworld.' ॥1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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