श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 21: श्रीराम का समुद्र के तट पर तीन दिनों तक धरना देने पर भी समुद्र के दर्शन न देने से बाण मारकर विक्षुब्ध कर देना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  6.21.32 
आघूर्णिततरङ्गौघ: सम्भ्रान्तोरगराक्षस:।
उद्वर्तितमहाग्राह: सघोषो वरुणालय:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
समुद्र की लहरें हिलोरें लेने लगीं। वहाँ रहने वाले सर्प और राक्षस भयभीत हो गए। बड़े-बड़े मगरमच्छ उछलने लगे और वरुण के निवासस्थान उस समुद्र में चारों ओर बड़ा कोलाहल मच गया।
 
The ocean's undulating waves began to sway and whirl. The serpents and demons living there were terrified. Big crocodiles began to jump up and there was a great uproar all around in that ocean, the abode of Varuna.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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