vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 6: युद्ध काण्ड
»
सर्ग 21: श्रीराम का समुद्र के तट पर तीन दिनों तक धरना देने पर भी समुद्र के दर्शन न देने से बाण मारकर विक्षुब्ध कर देना
»
श्लोक 27
श्लोक
6.21.27
ते ज्वलन्तो महावेगास्तेजसा सायकोत्तमा:।
प्रविशन्ति समुद्रस्य जलं वित्रस्तपन्नगम्॥ २७॥
अनुवाद
वे उत्तम बाण तेज से प्रज्वलित होकर समुद्र के जल में जा लगे और वहाँ रहने वाले सर्प भय से काँप उठे ॥27॥
Blazing with brilliance, those excellent arrows of great speed entered the waters of the ocean. The snakes living there trembled with fear. 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×