श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 21: श्रीराम का समुद्र के तट पर तीन दिनों तक धरना देने पर भी समुद्र के दर्शन न देने से बाण मारकर विक्षुब्ध कर देना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  6.21.26 
सम्पीडॺ च धनुर्घोरं कम्पयित्वा शरैर्जगत्।
मुमोच विशिखानुग्रान् वज्रानिव शतक्रतु:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने अपने भयंकर धनुष को धीरे से दबाकर उसकी प्रत्यंचा चढ़ाई और उसकी ध्वनि से सम्पूर्ण जगत् को कँपाते हुए अनेक भयंकर बाण छोड़े, मानो इन्द्र ने बहुत से वज्रों का प्रहार किया हो।
 
Gently pressing his dreadful bow, He strung it and with its sound, trembling the entire world, He released many dreadful arrows, as if Indra had struck with a multitude of thunderbolts.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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