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ramayan 6.21.20-21h: 'यह समुद्र, जो मगरमच्छों का निवास है, मुझे क्षमा से परिपूर्ण देखकर असहाय समझने लगा है। ऐसे मूर्खों को दी गई क्षमा शाप है।'   |   ramayan सर्ग 6.21: श्रीराम का समुद्र के तट पर तीन दिनों तक धरना देने पर भी समुद्र के दर्शन न देने से बाण मारकर विक्षुब्ध कर देना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 21: श्रीराम का समुद्र के तट पर तीन दिनों तक धरना देने पर भी समुद्र के दर्शन न देने से बाण मारकर विक्षुब्ध कर देना  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  6.21.20-21h 
क्षमया हि समायुक्तं मामयं मकरालय:॥ २०॥
असमर्थं विजानाति धिक् क्षमामीदृशे जने।
 
 
अनुवाद
'यह समुद्र, जो मगरमच्छों का निवास है, मुझे क्षमा से परिपूर्ण देखकर असहाय समझने लगा है। ऐसे मूर्खों को दी गई क्षमा शाप है।'
 
‘This ocean, which is the abode of crocodiles, has started considering me helpless after seeing me filled with forgiveness. Forgiveness shown to such fools is a curse. 20 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)