श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 21: श्रीराम का समुद्र के तट पर तीन दिनों तक धरना देने पर भी समुद्र के दर्शन न देने से बाण मारकर विक्षुब्ध कर देना  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  6.21.19-20h 
सशङ्खशुक्तिकाजालं समीनमकरं तथा॥ १९॥
अद्य युद्धेन महता समुद्रं परिशोषये।
 
 
अनुवाद
‘आज मैं महान् युद्ध करने का निश्चय करके समुद्र को, उसकी समस्त सीपियों को, मछलियों और मगरमच्छों सहित सुखा दूँगा।॥19 1/2॥
 
‘Today, having resolved to fight a great war, I will dry up the sea along with all its shells and oysters, and the fishes and crocodiles.॥ 19 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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