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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 6: युद्ध काण्ड
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सर्ग 21: श्रीराम का समुद्र के तट पर तीन दिनों तक धरना देने पर भी समुद्र के दर्शन न देने से बाण मारकर विक्षुब्ध कर देना
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श्लोक 16-17h
श्लोक
6.21.16-17h
न साम्ना शक्यते कीर्तिर्न साम्ना शक्यते यश:॥ १६॥
प्राप्तुं लक्ष्मण लोकेऽस्मिञ्जयो वा रणमूर्धनि।
अनुवाद
लक्ष्मण! इस संसार में समनीति (शान्ति) से न तो यश प्राप्त होता है, न कीर्ति फैलती है और न ही युद्ध में विजय प्राप्त होती है।
Lakshmana! In this world, neither fame can be achieved nor fame can be spread nor victory can be achieved in a war through Samneeti (peace).
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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