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ramayan 6.21.15-16h: जो व्यक्ति अपनी प्रशंसा करता है, दुष्ट है, निर्लज्ज है, सब जगह आक्रमण करता है और अच्छे-बुरे दोनों को कठोर दंड देता है, उसका सभी लोग आदर करते हैं।॥ 15 1/2॥   |   ramayan सर्ग 6.21: श्रीराम का समुद्र के तट पर तीन दिनों तक धरना देने पर भी समुद्र के दर्शन न देने से बाण मारकर विक्षुब्ध कर देना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 21: श्रीराम का समुद्र के तट पर तीन दिनों तक धरना देने पर भी समुद्र के दर्शन न देने से बाण मारकर विक्षुब्ध कर देना  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  6.21.15-16h 
आत्मप्रशंसिनं दुष्टं धृष्टं विपरिधावकम्॥ १५॥
सर्वत्रोत्सृष्टदण्डं च लोक: सत्कुरुते नरम्।
 
 
अनुवाद
जो व्यक्ति अपनी प्रशंसा करता है, दुष्ट है, निर्लज्ज है, सब जगह आक्रमण करता है और अच्छे-बुरे दोनों को कठोर दंड देता है, उसका सभी लोग आदर करते हैं।॥ 15 1/2॥
 
Everyone respects a person who praises himself, is wicked, impudent, attacks everywhere and punishes both good and bad people severely.॥ 15 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)