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ramayan 6.21.14-15h: समुद्र को अपने पर बड़ा अभिमान है, इसी कारण वह मुझे दर्शन नहीं दे रहा है। शांति, क्षमा, सरलता और मधुर वाणी - ये सत्पुरुषों के गुण हैं। जब इनका प्रयोग निर्गुण मनुष्यों पर किया जाता है, तो परिणाम यह होता है कि वे गुणवान मनुष्य को भी अयोग्य समझते हैं।॥14 1/2॥   |   ramayan सर्ग 6.21: श्रीराम का समुद्र के तट पर तीन दिनों तक धरना देने पर भी समुद्र के दर्शन न देने से बाण मारकर विक्षुब्ध कर देना   ।   ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 21: श्रीराम का समुद्र के तट पर तीन दिनों तक धरना देने पर भी समुद्र के दर्शन न देने से बाण मारकर विक्षुब्ध कर देना  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  6.21.14-15h 
अवलेप: समुद्रस्य न दर्शयति य: स्वयम्।
प्रशमश्च क्षमा चैव आर्जवं प्रियवादिता॥ १४॥
असामर्थ्यफला ह्येते निर्गुणेषु सतां गुणा:।
 
 
अनुवाद
समुद्र को अपने पर बड़ा अभिमान है, इसी कारण वह मुझे दर्शन नहीं दे रहा है। शांति, क्षमा, सरलता और मधुर वाणी - ये सत्पुरुषों के गुण हैं। जब इनका प्रयोग निर्गुण मनुष्यों पर किया जाता है, तो परिणाम यह होता है कि वे गुणवान मनुष्य को भी अयोग्य समझते हैं।॥14 1/2॥
 
‘The ocean is very proud of itself, due to which it is not revealing itself to me. Peace, forgiveness, simplicity and sweet speech – these are the qualities of good men. When these are used on people without qualities, the result is that they consider even that person with qualities as incapable.॥ 14 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)