श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 21: श्रीराम का समुद्र के तट पर तीन दिनों तक धरना देने पर भी समुद्र के दर्शन न देने से बाण मारकर विक्षुब्ध कर देना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  6.21.1 
तत: सागरवेलायां दर्भानास्तीर्य राघव:।
अञ्जलिं प्राङ्मुख: कृत्वा प्रतिशिश्ये महोदधे:॥ १॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् श्री रघुनाथजी समुद्र के तट पर गद्दी पर हाथ जोड़कर पूर्वाभिमुख होकर लेट गए॥1॥
 
Thereafter, Shri Raghunath ji lay down on a cushion spread on the sea shore with his hands folded and facing east. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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