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अवधीस्त्वं जरावृद्धं गृध्रराजं जटायुषम्।
किं नु ते रामसांनिध्ये सकाशे लक्ष्मणस्य च।
हृता सीता विशालाक्षी यां त्वं गृह्य न बुध्यसे॥ २७॥
अनुवाद
‘तुमने चिरयुवा गिद्धराज जटायु को क्यों मारा? यदि तुममें महान बल था, तो तुमने श्रीराम और लक्ष्मण से बड़ी-बड़ी आँखों वाली सीता का हरण क्यों नहीं किया? सीता को हरकर तुम पर जो विपत्ति आई है, उसे तुम क्यों नहीं समझ रहे हो?॥27॥
‘Why did you kill the age-old vulture king Jatayu? If you had great strength, why did you not abduct Sita with big eyes from Shri Ram and Lakshman? Why are you not realising the calamity that has befallen you by taking Sita away?॥ 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥