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श्लोक 6.2.24  |
किमुक्त्वा बहुधा चापि सर्वथा विजयी भवान्।
निमित्तानि च पश्यामि मनो मे सम्प्रहृष्यति॥ २४॥ |
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| अनुवाद |
| अधिक कहने से क्या लाभ! मुझे विश्वास है कि तुम अवश्य विजयी होगे; क्योंकि मैं ऐसे शकुन देख रहा हूँ और मेरा हृदय भी हर्ष और उत्साह से भर गया है॥24॥ |
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| What is the use of saying much! I am sure that you will definitely be victorious; because I see such omens and my heart is also filled with joy and enthusiasm.'॥ 24॥ |
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इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये युद्धकाण्डे द्वितीय: सर्ग: ॥ २ ॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके युद्धकाण्डमें दूसरा सर्ग पूरा हुआ ॥ २ ॥ |
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