श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 2: सुग्रीव का श्रीराम को उत्साह प्रदान  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  6.2.23 
कथंचित् परिपश्यामि लङ्घितं वरुणालयम्।
हतमित्येव तं मन्ये युद्धे शत्रुनिबर्हण॥ २३॥
 
 
अनुवाद
शत्रुसूदन श्री राम! यदि मैं किसी प्रकार इस वानर सेना को समुद्र के उस पार पहुँचते देख सकूँ, तो मैं रावण को युद्ध में मरा हुआ समझूँगा॥ 23॥
 
Shatrusudana Shri Ram! If somehow I am able to see this monkey army reaching the other side of the ocean, then I will consider Ravana as dead in the war.॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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