श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 2: सुग्रीव का श्रीराम को उत्साह प्रदान  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  6.2.15 
अस्मिन् काले महाप्राज्ञ सत्त्वमातिष्ठ तेजसा।
शूराणां हि मनुष्याणां त्वद्विधानां महात्मनाम्।
विनष्टे वा प्रणष्टे वा शोक: सर्वार्थनाशन:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
अतः हे महाज्ञानी श्री राम! इस समय आपको तेज के साथ धैर्य का भी आश्रय लेना चाहिए। यदि कोई वस्तु नष्ट हो जाए, तो आपके समान वीर और महापुरुष को उसके लिए शोक नहीं करना चाहिए; क्योंकि शोक सारे काम बिगाड़ देता है॥ 15॥
 
‘Therefore, O great-wise Shri Ram! At this time, you should take shelter of patience along with brilliance. If something is lost or destroyed, a brave and great man like you should not grieve for it; because grief spoils all the work.॥ 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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