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श्लोक 6.2.14  |
यत् तु कार्यं मनुष्येण शौटीर्यमवलम्ब्यताम्।
तदलंकरणायैव कर्तुर्भवति सत्वरम्॥ १४॥ |
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| अनुवाद |
| मनुष्य को चाहिए कि उस पराक्रम का ही आश्रय ले, क्योंकि वह शीघ्र ही कर्ता को सुशोभित करता है और उसे इच्छित फल की प्राप्ति कराता है॥14॥ |
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| A man should take recourse to that bravery only, because it soon adorns the doer and helps him achieve his desired result.॥ 14॥ |
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