श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 2: सुग्रीव का श्रीराम को उत्साह प्रदान  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  6.2.14 
यत् तु कार्यं मनुष्येण शौटीर्यमवलम्ब्यताम्।
तदलंकरणायैव कर्तुर्भवति सत्वरम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य को चाहिए कि उस पराक्रम का ही आश्रय ले, क्योंकि वह शीघ्र ही कर्ता को सुशोभित करता है और उसे इच्छित फल की प्राप्ति कराता है॥14॥
 
A man should take recourse to that bravery only, because it soon adorns the doer and helps him achieve his desired result.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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