श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 2: सुग्रीव का श्रीराम को उत्साह प्रदान  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  6.2.12 
सेतुबन्ध: समुद्रे च यावल्लङ्कासमीपत:।
सर्वं तीर्णं च मे सैन्यं जितमित्युपधारय।
इमे हि समरे वीरा हरय: कामरूपिण:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
अतः जब लंका के पास समुद्र पर पुल बन जाएगा, तब हमारी सारी सेना उस पार चली जाएगी। तब तुम समझना कि हमारी विजय हो गई; क्योंकि इच्छानुसार रूप धारण करने वाले ये वानर युद्ध में महान पराक्रम दिखाएंगे॥ 12॥
 
‘So when the bridge is built over the sea near Lanka, then our entire army will cross over to the other side. Then you should consider that we have won; because these monkeys who can assume any form as per their wish will show great bravery in the war.॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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