श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 19: विभीषण का आकाश से उतरकर भगवान् श्रीराम के चरणों की शरण लेना, श्रीराम का रावण-वध की प्रतिज्ञा करना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  6.19.40 
विभीषणस्य शूरस्य यथार्थं क्रियतां वच:।
अलं कालात्ययं कृत्वा सागरोऽयं नियुज्यताम्।
यथा सैन्येन गच्छाम पुरीं रावणपालिताम्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
अतः तुम्हें वीर विभीषण के सत्य वचनों के अनुसार कार्य करना चाहिए। अब और विलम्ब करना उचित नहीं है। इस समुद्र से प्रार्थना करनी चाहिए कि वह हमारी सहायता करे, जिससे हम अपनी सेना सहित रावण द्वारा शासित लंकापुरी में पहुँच सकें।॥40॥
 
Therefore you should act according to the true words of the valiant Vibhishan. Now it is not right to delay any more. This ocean should be requested to help us so that we can reach Lankapuri ruled by Ravana along with our army.'॥ 40॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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