श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 19: विभीषण का आकाश से उतरकर भगवान् श्रीराम के चरणों की शरण लेना, श्रीराम का रावण-वध की प्रतिज्ञा करना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  6.19.33 
ततश्चाख्यातुमारेभे विभीषणवच: शुभम्।
सुग्रीवो विपुलग्रीव: सागरस्योपवेशनम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
वहाँ विशाल गर्दन वाले सुग्रीव ने समुद्र पर बैठने के विषय में विभीषण के शुभ वचन सुनाने शुरू किये।
 
There Sugreeva, the one with the huge neck, began to narrate the auspicious words of Vibhishan regarding sitting on the sea. 33.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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