श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 19: विभीषण का आकाश से उतरकर भगवान् श्रीराम के चरणों की शरण लेना, श्रीराम का रावण-वध की प्रतिज्ञा करना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  6.19.27 
तं प्रसादं तु रामस्य दृष्ट्वा सद्य: प्लवङ्गमा:।
प्रचुक्रुशुर्महात्मानं साधुसाध्विति चाब्रुवन्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
भगवान् श्री रामजी का यह तत्काल प्रसाद (कृपा) देखकर सब वानर हर्ष की ध्वनि करते हुए महात्मा श्री रामजी को धन्यवाद देने लगे॥27॥
 
Seeing this immediate Prasad (grace) of Lord Shri Ram, all the monkeys started making sounds of joy and thanking Mahatma Shri Ram. 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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