Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.19.24-25: विभीषण के ऐसा कहने पर भगवान् श्री राम ने उन्हें गले लगा लिया और प्रसन्न होकर लक्ष्मण से बोले - 'दूसरों को सम्मान देने वाले सुमित्रनन्दन! तुम समुद्र से जल ले आओ और उससे शीघ्र ही अत्यंत बुद्धिमान राक्षसराज विभीषण का लंका के राज्य पर अभिषेक करो। मेरी प्रसन्नता से उन्हें यह लाभ अवश्य मिले।' 24-25॥ | ramayan सर्ग 6.19: विभीषण का आकाश से उतरकर भगवान् श्रीराम के चरणों की शरण लेना, श्रीराम का रावण-वध की प्रतिज्ञा करना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विभीषण के ऐसा कहने पर भगवान् श्री राम ने उन्हें गले लगा लिया और प्रसन्न होकर लक्ष्मण से बोले - 'दूसरों को सम्मान देने वाले सुमित्रनन्दन! तुम समुद्र से जल ले आओ और उससे शीघ्र ही अत्यंत बुद्धिमान राक्षसराज विभीषण का लंका के राज्य पर अभिषेक करो। मेरी प्रसन्नता से उन्हें यह लाभ अवश्य मिले।' 24-25॥
When Vibhishan said this, Lord Shri Ram hugged him and being happy said to Lakshman - 'Sumitranandan, who gives respect to others! You bring water from the sea and with it quickly anoint the extremely intelligent demon king Vibhishan over the kingdom of Lanka. They should get this benefit if I am happy. 24-25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥