Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 6.19.22: श्री रामचन्द्रजी के ये वचन सुनकर, जिन्होंने अनायास ही महान कर्म किए थे, धर्मात्मा विभीषण ने सिर झुकाकर उन्हें प्रणाम किया और फिर इस प्रकार कहने लगे- 22॥ | ramayan सर्ग 6.19: विभीषण का आकाश से उतरकर भगवान् श्रीराम के चरणों की शरण लेना, श्रीराम का रावण-वध की प्रतिज्ञा करना । ramayan काण्ड 6: युद्ध काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्री रामचन्द्रजी के ये वचन सुनकर, जिन्होंने अनायास ही महान कर्म किए थे, धर्मात्मा विभीषण ने सिर झुकाकर उन्हें प्रणाम किया और फिर इस प्रकार कहने लगे- 22॥
Hearing these words of Shri Ramchandraji, who performed great deeds spontaneously, the virtuous Vibhishan bowed his head and saluted him and then started saying thus - 22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥