श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 6: युद्ध काण्ड  »  सर्ग 19: विभीषण का आकाश से उतरकर भगवान् श्रीराम के चरणों की शरण लेना, श्रीराम का रावण-वध की प्रतिज्ञा करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  6.19.20 
रसातलं वा प्रविशेत् पातालं वापि रावण:।
पितामहसकाशं वा न मे जीवन् विमोक्ष्यते॥ २०॥
 
 
अनुवाद
‘यदि रावण रसातल या पाताल में भी प्रवेश कर जाए अथवा पितामह ब्रह्मा के पास चला जाए, तो भी वह मेरे हाथों से जीवित बच नहीं सकेगा।॥ 20॥
 
‘Even if Ravana enters the abyss or the netherworld or goes to Grandfather Brahma, he will not be able to escape from my hands alive.॥ 20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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