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श्लोक 6.19.20  |
रसातलं वा प्रविशेत् पातालं वापि रावण:।
पितामहसकाशं वा न मे जीवन् विमोक्ष्यते॥ २०॥ |
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| अनुवाद |
| ‘यदि रावण रसातल या पाताल में भी प्रवेश कर जाए अथवा पितामह ब्रह्मा के पास चला जाए, तो भी वह मेरे हाथों से जीवित बच नहीं सकेगा।॥ 20॥ |
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| ‘Even if Ravana enters the abyss or the netherworld or goes to Grandfather Brahma, he will not be able to escape from my hands alive.॥ 20॥ |
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